Wednesday, 21 December 2011


तुम हो महान मैं अल्प जीव तेरी महिमा कैसे गाउँ तुम रॉम रॉम मे रमे हुए मै फिर भी समझ न पाउ हो कृपा राधिका रानी की मैं ये उलझन सुलझाओ इस सूखे नीरस जीवन मे कुछ प्रेम सुधा बरसऔ।  




।♥ जय जय श्री राधे ♥।   
आहा! री ......
सखी ! देखो री ये नन्द का छोरा......
कितना सुन्दर, कितना प्यारा......
ठेर कदम्ब की छाया में ठाडो,
यशुमति के नैनन का तारा.......

ऐसी बाँसुरी बजावे....ऐसी बाँसुरी बजावे,
बरस परे रसधारा.......
ब्रज ब्रज की एक एक गोपी ने,
इस पे तन, मन वारा........

आहा! रे देखो रे ये नन्द का छोरा......
कितना सुन्दर, कितना प्यारा....

श्री राधे........:) :)




♥ कृष्णा ♥ 


मेरे प्राणों का सहारा मेरी ही वे आन हैं 
मेरी हर इक साँस लेती, तेरा ही ♥ कृष्णा ♥ नाम हैं 
कुछ नही हू ♥ कृष्णा ♥, तेरी ही बस शान हू 
जानो दिल का दर्द मेरा, करुना कर तू जान ले
अब तो चरणों में ही ले लो, इतना ही अब मान ले 
यह दिल की पीड़ा, को ♥ कृष्णा ♥ पहचान ले 


♥ हरी बोल ♥

बांके बिहारी की मुरलिया


मोहन के लब पे देखो, क्या खुशनुमा है बंसी
बंसी पे लब फ़िदा है या लब पे फ़िदा है बंसी
मुर्दे को करदे जिन्दा और जिन्दे को करदे मुर्दा
ये खुद खुदा नहीं, पर शान-ऐ-खुदा है बंसी


♥ कृष्णा ♥ शरण तुम्हारी

♥ कृष्णा ♥ जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते हो |

♥ कृष्णा ♥ नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते हो ||


♥ कृष्णा ♥ तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |


द्वार तुम्हारा छोड़ के ♥ कृष्णा ♥ और कहाँ मैं जाऊँ ||


♥ कृष्णा ♥ कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |

♥ हरी बोल ♥

'राधा जू मेरी करुणामयी सरकार

राधा जू मेरी करुणामयी सरकार
राधा जू मम जीवन प्राण आधार
राधा जू मेरी दयामयी सरकार
जय राधे राधे राधे जय राधे राधे राधे
राधा जू मेरी करुणामयी सरकार ''

निज भक्ति का भाव जगा दो
श्याम जू मोहे श्याम से मिला दो
मेरा भाव करो स्वीकार
राधा जू मेरी करुणामयी सरकार ''
जय राधे राधे राधे जय राधे राधे राधे

लाडली जू तेरे लाड का प्यासा
अब तो आके दे दो दिलासा
मैं तो कबसे खड़ी हूँ तेरे द्वार
राधा जू मेरी करुणामयी सरकार ''
जय राधे राधे राधे जय राधे राधे राधे

जय जय श्री राधे
जय हो बरसाने वारी की

करुना रस बरसाने वाली राधिका किशोरी की जय




अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये वंशी

♥ कृष्णा ♥ 


अधरों पे जा सजी है कन्हैया तेरी ये वंशी.
ये तान दे निराली बजैया तेरी ये वंशी.
हम सबको बाँधती है तेरी राह और डगर पे-
अब मन नहीं है बस में बसैया तेरी ये वंशी..
ये प्रेम तो अमर है राधा किशन से जग में.
सब लोग दिख रहे है इसमें मगन से जग में.
माहौल प्यार का ये कुदरत तभी बनाये-
जब मन करे समर्पित खुद को बदन से जग में..