Wednesday, 21 December 2011

♥ कृष्णा ♥ शरण तुम्हारी

♥ कृष्णा ♥ जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते हो |

♥ कृष्णा ♥ नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते हो ||


♥ कृष्णा ♥ तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |


द्वार तुम्हारा छोड़ के ♥ कृष्णा ♥ और कहाँ मैं जाऊँ ||


♥ कृष्णा ♥ कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |

♥ हरी बोल ♥

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