Wednesday, 21 December 2011

आहा! री ......
सखी ! देखो री ये नन्द का छोरा......
कितना सुन्दर, कितना प्यारा......
ठेर कदम्ब की छाया में ठाडो,
यशुमति के नैनन का तारा.......

ऐसी बाँसुरी बजावे....ऐसी बाँसुरी बजावे,
बरस परे रसधारा.......
ब्रज ब्रज की एक एक गोपी ने,
इस पे तन, मन वारा........

आहा! रे देखो रे ये नन्द का छोरा......
कितना सुन्दर, कितना प्यारा....

श्री राधे........:) :)



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